दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को बड़ी राहत दी है। अदालत ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है। सोमवार को जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया और जेएनयू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
बिमोल अकोइजाम इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं। वह जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स के प्रोफेसर थे। विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर को उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था। यह कार्रवाई कई छात्राओं की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद की गई थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं। जेएनयू की आंतरिक समिति ने मामले की जांच की और उनके खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें सेवा से हटाने का फैसला लिया।
अकोइजाम ने हाईकोर्ट में अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि कार्रवाई से पहले उन्हें उचित नोटिस नहीं दिया गया और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने प्रक्रिया में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। प्रोफेसर ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है और कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित की है। इस बीच यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ी पुलिस जांच जारी है।


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