दिल्ली के जयपुर पोलो ग्राउंड परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने 27 अक्टूबर को मस्जिद को संभावित तोड़फोड़ से बचाने और नमाज पढ़ने वालों को प्रवेश देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। यह याचिका सैयद अहमद सऊद ने दायर की है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होनी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मस्जिद में नमाज पढ़ने जाने वाले लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। याचिका के मुताबिक, 21 अक्टूबर को याचिकाकर्ता और उनके साथ आए लोगों को परिसर के प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया था। याचिका में नमाज के लिए प्रवेश बहाल करने और मस्जिद को संरक्षण देने की मांग की गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि फिलहाल मस्जिद के खिलाफ तोड़फोड़ की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर में मस्जिद के साथ एक मंदिर भी मौजूद है। आसपास के क्षेत्र में चल रहे ध्वस्तीकरण कार्य और भारी मशीनों से संभावित खतरे को देखते हुए मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद की गई थी।
याचिकाकर्ता ने मस्जिद को वक्फ संपत्ति बताते हुए उसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का हवाला दिया है। उनका कहना है कि मस्जिद को ग्रेड-2 विरासत संरचना के रूप में अधिसूचित किया गया है और उसके संबंध में कोई भी कदम उठाने से पहले संबंधित नियमों का पालन जरूरी है।
अब अदालत में यह सवाल भी विचाराधीन है कि मस्जिद पर लागू प्रतिबंधों का कानूनी आधार क्या है और क्या पहले के ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश इस परिसर पर भी लागू होते हैं। अगली सुनवाई में केंद्र का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अदालत ने याचिका पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।



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