देश में एसिड अटैक की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सिर्फ सर्कुलर जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। एसिड अटैक पीड़ितों को न्याय और उचित सहायता दिलाने के साथ-साथ ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना भी जरूरी है।

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एसिड अटैक में पीड़ितों को गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में उनके चेहरे और शरीर पर स्थायी चोटें आती हैं। इलाज लंबा चलता है और पीड़ितों को सामाजिक व आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कानून का प्रभावी पालन और पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत में एसिड की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के तहत तेजाब की बिक्री और खरीद पर निगरानी, खरीदार की पहचान तथा बिक्री का रिकॉर्ड रखने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके बावजूद नियमों के उल्लंघन और एसिड अटैक की घटनाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही और नियमों के जमीनी स्तर पर पालन की जरूरत को रेखांकित किया है। केवल दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि उनका पालन हो रहा है या नहीं।

एसिड अटैक की रोकथाम के लिए तेजाब की अवैध बिक्री पर नियंत्रण, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को समय पर इलाज व मुआवजा उपलब्ध कराना अहम है। अदालत की टिप्पणी के बाद अब केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।