हार्ट की सेहत का पता लगाने के लिए सिर्फ सामान्य कोलेस्ट्रॉल टेस्ट पर निर्भर रहना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। कई बार कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य होने के बावजूद हार्ट अटैक का खतरा बना रह सकता है। ऐसे में लिपोप्रोटीन(a), यानी Lp(a) टेस्ट के बारे में जानना जरूरी है। यह खून में मौजूद एक खास प्रकार के लिपोप्रोटीन का स्तर मापता है, जो हृदय रोगों के जोखिम से जुड़ा होता है।
Lp(a) शरीर में पाया जाने वाला एक प्रकार का कण है, जिसमें फैट और प्रोटीन दोनों मौजूद होते हैं। इसका स्तर काफी हद तक आनुवंशिक कारणों से तय होता है। खानपान और जीवनशैली में बदलाव से इस स्तर पर सामान्य कोलेस्ट्रॉल की तुलना में कम असर पड़ता है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर में Lp(a) का स्तर अधिक है, तो उसे दिल की धमनियों में प्लाक जमा होने और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल की जांच में टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर देखा जाता है। लेकिन इन जांचों से Lp(a) के स्तर की जानकारी नहीं मिलती। इसके लिए अलग से ब्लड टेस्ट कराया जाता है। इस जांच की खास बात यह है कि इसे जीवन में कम से कम एक बार कराने पर विचार किया जा सकता है, खासकर उन लोगों को जिनके परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या हृदय रोग का इतिहास रहा हो।
विशेषज्ञों की सलाह है कि Lp(a) टेस्ट की जरूरत व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर तय की जानी चाहिए। यदि इसका स्तर अधिक आता है, तो डॉक्टर ब्लड प्रेशर, LDL कोलेस्ट्रॉल और दूसरे जोखिम कारकों को नियंत्रित रखने की सलाह दे सकते हैं। केवल Lp(a) का स्तर जानना हार्ट अटैक को रोकने की गारंटी नहीं है, लेकिन इससे हृदय रोग के जोखिम का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है।



0 comments
No comments yet. Yours would be the first.