दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई इंडिया ब्लॉक की रैली के बाद सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए। इन विजुअल्स के जरिए रैली में भारी भीड़ जुटने का दावा किया गया। हालांकि, फैक्ट चेक में सामने आया कि वायरल तस्वीरें AI से बनाई गई थीं, जबकि कुछ अन्य विजुअल पुराने या दूसरे कार्यक्रमों के थे।
वायरल तस्वीर में रामलीला मैदान को भारी भीड़ से भरा दिखाया गया था। तस्वीर में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पोस्टर भी नजर आए। जांच के दौरान पोस्टर पर नेताओं के चेहरे वास्तविक तस्वीरों से मेल नहीं खाते दिखे। इसके अलावा मंच की बनावट भी वास्तविक रैली के मंच से अलग थी।
फैक्ट चेक के दौरान तस्वीरों को AI डिटेक्शन टूल्स से जांचा गया। Hive Moderation और Sightengine जैसे टूल्स ने तस्वीरों के AI से बनाए जाने के संकेत दिए। SynthID डिटेक्टर ने भी तस्वीर में डिजिटल वॉटरमार्क की पहचान की, जिससे पता चला कि इसे OpenAI के टूल्स से बनाया या एडिट किया गया था।
इसके अलावा एक वायरल वीडियो को 1 नवंबर की रैली का बताकर शेयर किया गया। जांच में सामने आया कि यह वीडियो दिसंबर 2025 में दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की एक पुरानी रैली का था। वहीं, एक वायरल अखबार की कटिंग भी फर्जी पाई गई, जिसमें भारतीय रेलवे में यात्रियों की भारी बढ़ोतरी का दावा किया गया था।
फैक्ट चेक से साफ हुआ कि वायरल तस्वीरें और वीडियो रैली की वास्तविक स्थिति दिखाने वाले प्रमाण नहीं हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे ऐसे विजुअल्स पर भरोसा करने से पहले उनकी जांच जरूरी है।


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