यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेनाओं के बीच संघर्ष तेज हो गया है. देश का उत्तरी प्रांत अल जौफ युद्ध का नया हॉटस्पॉट बनकर उभरा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार की सेना ने यहां हूतियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है. इसका उद्देश्य रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर हूती विद्रोहियों की बढ़त को रोकना और सरकारी नियंत्रण बहाल करना है.

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सरकारी सेना ने अल जौफ की राजधानी अल हज्म के पूर्व में स्थित महत्वपूर्ण पहाड़ियों और ऊंचाई वाले इलाकों पर कब्जा करने के लिए जवाबी अभियान चलाया है. सेना के अधिकारियों के मुताबिक, उसने हुयविशियन पर्वत श्रृंखला पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. यह क्षेत्र हूतियों की रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

इन पहाड़ियों पर कब्जा मिलने से सरकारी सेना को हूतियों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी सप्लाई लाइन बाधित करने में मदद मिल सकती है. सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले इलाकों पर नियंत्रण युद्ध में रणनीतिक बढ़त दिलाता है. अल जौफ की भौगोलिक स्थिति भी इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है. यह प्रांत सऊदी अरब की सीमा से लगा है और सना, सादा तथा मारिब जैसे अहम क्षेत्रों के करीब स्थित है.

अल जौफ में जारी अभियान अक्टूबर में शुरू किए गए ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन का हिस्सा है. इसके जरिए सरकारी सेना हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेने की कोशिश कर रही है. हालांकि, हूतियों ने सरकारी सेना की बढ़त के दावों को चुनौती दी है और कहा है कि उन्होंने कई हमलों को नाकाम किया है.