सिद्धार्थनगर जिले में फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में प्रधानाध्यापिका सुनैना गौड़ पर बड़ी कार्रवाई हुई है. बेसिक शिक्षा विभाग ने उनकी नियुक्ति को मूल तारीख से समाप्त करने का आदेश जारी किया है. साथ ही करीब 16 साल तक मिले वेतन की वसूली और एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं.

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सुनैना गौड़ की नियुक्ति 30 जुलाई 2010 को प्राथमिक विद्यालय पल्हया में सहायक अध्यापक के पद पर एसटी कोटे से हुई थी. बाद में पदोन्नति के बाद वह प्राथमिक विद्यालय उटियां, उसका बाजार में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हुईं. उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी.

जांच के दौरान जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने 7 जुलाई 2026 को सुनैना गौड़ और उनके परिवार के सदस्यों के एसटी प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए. इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई शुरू की.

अब बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए सुनैना गौड़ की नियुक्ति 30 जुलाई 2010 से ही समाप्त मानने का निर्देश दिया है. यानी विभाग ने उनकी नौकरी को नियुक्ति की मूल तारीख से निरस्त कर दिया है.

संशोधित आदेश के अनुसार, वित्त एवं लेखाधिकारी को नियुक्ति से अब तक दिए गए वेतन की गणना कर नियमानुसार वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं. संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को सुनैना गौड़ के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने को भी कहा गया है. साथ ही पूरी कार्रवाई मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.

इस मामले में विभागीय कार्रवाई के बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामलों पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं.