चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद चीन कई गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. ब्रिटिश लेखक और राजनीतिक विश्लेषक जेम्स क्रैबट्री ने चीन के हालिया दौरे के बाद वहां की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि चीन में तकनीकी विकास तेजी से हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था की हालत काफी कमजोर दिखाई दे रही है.
क्रैबट्री ने चीन की अर्थव्यवस्था को K-shaped बताया है. इसका मतलब है कि देश के कुछ क्षेत्र तेजी से तरक्की कर रहे हैं, जबकि दूसरे हिस्से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ड्रोन जैसी तकनीकों में दुनिया को चुनौती दे रहा है, लेकिन घरेलू मांग और निवेश में कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है.
चीन की आर्थिक मुश्किलों के पीछे रियल एस्टेट सेक्टर का संकट भी एक बड़ी वजह है. घरों की कीमतों में गिरावट और कमजोर मांग से लोगों का भरोसा प्रभावित हुआ है. इसके अलावा रोजगार को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं. क्रैबट्री ने आधिकारिक बेरोजगारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति इससे ज्यादा खराब हो सकती है.
चीन की इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियां भी घरेलू बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही हैं. लगातार कीमतें घटाने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है. ऐसे में कई कंपनियां विदेशी बाजारों में विस्तार कर रही हैं.
अर्थशास्त्री माइकल पेटिस के मुताबिक, चीन को लंबे समय तक धीमी आर्थिक वृद्धि और ठहराव का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, चीन की तकनीकी ताकत मजबूत है, लेकिन कमजोर घरेलू मांग और आर्थिक असंतुलन उसके सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं.


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