इजरायल में चुनाव नतीजों को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने अरब मतदाताओं के वोटों पर सवाल उठाने और पूरे समुदाय को बदनाम करने से बचने की चेतावनी दी। राष्ट्रपति ने 2026 के संसदीय चुनाव के आधिकारिक नतीजों को स्वीकार करते हुए उन्हें मंजूरी दे दी है। इस फैसले से नेतन्याहू की चुनावी धांधली के दावों को बड़ा झटका लगा है।

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इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने पिछले सप्ताह हुए चुनाव के बाद 9,069 मतदान केंद्रों की जांच की थी। आयोग के मुताबिक, उसे ऐसी कोई अनियमितता नहीं मिली, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई हो या नतीजे बदल गए हों। चुनाव आयोग के अध्यक्ष नोआम सोहल्बर्ग ने कहा कि चुनाव परिणामों पर संदेह जताना लोकतंत्र के लिए वास्तविक खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाताओं के फैसले का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।

दरअसल, नेतन्याहू और उनके सहयोगियों ने आरोप लगाए थे कि अरब पार्टियों ने चुनाव में धांधली की और विदेशी हस्तक्षेप के जरिए नतीजों को प्रभावित किया। हालांकि, चुनाव आयोग की जांच में इन दावों की पुष्टि नहीं हुई। विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े कुछ संदेहों की जांच अभी जारी है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक, इससे चुनाव के समग्र नतीजों पर असर पड़ने के संकेत नहीं मिले हैं।

राष्ट्रपति हर्जोग ने अरब समाज के योगदान और मतदान में उसकी भागीदारी की सराहना करते हुए नस्लवादी टिप्पणियों की भी निंदा की। अब वह नई सरकार के गठन के लिए राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे। चुनाव में नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों पर रहा, जबकि विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में नई सरकार का गठन राजनीतिक बातचीत और गठबंधन पर निर्भर करेगा।