अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के मतदाताओं का रुख एक बार फिर चर्चा में है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच पहले के मुकाबले ज्यादा समर्थन मिला था, लेकिन 2026 के चुनाव से पहले सामने आए सर्वे में यह बढ़त कमजोर होती दिखाई दी। सवाल उठ रहा है कि क्या भारतीय मूल के मतदाता अब ट्रंप की पार्टी से दूरी बना रहे हैं?
कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और YouGov के अक्टूबर 2026 के सर्वे के मुताबिक, भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों में 62 फीसदी ने अपने कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को वोट देने की इच्छा जताई, जबकि 19 फीसदी रिपब्लिकन उम्मीदवार के समर्थन में थे। सीनेट चुनाव वाले राज्यों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 63 फीसदी और रिपब्लिकन को 21 फीसदी समर्थन मिला।
सर्वे के आंकड़े 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से तुलना करने पर दिलचस्प तस्वीर दिखाते हैं। उस चुनाव में 62 फीसदी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने कमला हैरिस का समर्थन किया था, जबकि 30 फीसदी ट्रंप के साथ थे। जनवरी 2026 में डेमोक्रेटिक समर्थन घटकर 57 फीसदी और ट्रंप के लिए समर्थन 25 फीसदी रह गया था। अक्टूबर के सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस बदलाव के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों, अर्थव्यवस्था और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भारतीय-अमेरिकी समुदाय में असंतोष बढ़ा है। टेक्सास के फ्रिस्को जैसे इलाकों में भारतीय समुदाय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और विरोध ने भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है।
हालांकि, सर्वे यह भी बताता है कि भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की पार्टी पहचान में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। 46 फीसदी खुद को डेमोक्रेट, 19 फीसदी रिपब्लिकन और 26 फीसदी स्वतंत्र मतदाता बताते हैं। ऐसे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को मिल रहा ज्यादा समर्थन केवल पार्टी से जुड़ाव नहीं, बल्कि रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रति नाराजगी का परिणाम भी हो सकता है।
इस चुनाव में भारतीय मूल के मतदाताओं का रुख अमेरिकी राजनीति में उनकी बढ़ती भूमिका और बदलती प्राथमिकताओं को समझने का अहम संकेत माना जा रहा है।


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