अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में आठ साल बाद छात्र संघ चुनाव हो रहे हैं. इस बार अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मोहम्मद नोमान अशरफ अपने भाषण और चुनावी वादों को लेकर चर्चा में हैं. इतिहास विभाग में पीएचडी के तीसरे वर्ष के शोध छात्र नोमान ने यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक यूनियन हॉल में आयोजित प्रेसिडेंशियल डिबेट में अपनी बात रखी. उनके भाषण ने कैंपस की छात्र राजनीति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जोड़ दिया.

AdvertisementThe Puranic

नोमान अशरफ के भाषण में जेल में बंद शरजील इमाम और उमर खालिद का जिक्र खास तौर पर चर्चा में रहा. उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला आने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को आतंकवादी का तमगा देना उचित नहीं है. उनके इस बयान ने चुनावी माहौल में नई बहस छेड़ दी. इसके अलावा उन्होंने गाजा, फिलिस्तीन, ईरान और सूडान के लोगों के प्रति एकजुटता भी जताई.

नोमान की चर्चा केवल उनके भाषण तक सीमित नहीं है. उन्होंने चुनाव के लिए 21 पन्नों का विस्तृत मैनिफेस्टो भी जारी किया है. इसमें शोधार्थियों के स्टाइपेंड को बढ़ाने, महिला सुरक्षा के लिए विमेंस सेल बनाने और एएमयू के ऑफ-कैंपस सेंटरों के छात्रों को प्रतिनिधित्व देने जैसे वादे शामिल हैं.

नोमान अशरफ के मैनिफेस्टो में नॉन-नेट शोधार्थियों का स्टाइपेंड 8,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है. वहीं किशनगंज, मुर्शिदाबाद और मल्लापुरम स्थित ऑफ-कैंपस सेंटरों के छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही गई है.

आठ साल बाद हो रहे इस चुनाव में नोमान की भाषण शैली और उनके वादों को लेकर छात्रों के बीच चर्चा तेज है. अब देखना होगा कि उनका यह चुनावी अभियान अध्यक्ष पद की दौड़ में कितना असर डालता है.