सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के रोटेशन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने याचिकाकर्ता को जवाब देते हुए कहा, 'आपने रॉन्ग नंबर मिलाया, जाओ प्रोटेस्ट करो.' अदालत की इस टिप्पणी ने सुनवाई के दौरान सबका ध्यान खींचा.

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याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि लोकसभा और विधानसभा में SC-ST के लिए आरक्षित सीटों को हर चुनाव में बदला जाए. उनका तर्क था कि आरक्षित सीटों के लगातार एक ही निर्वाचन क्षेत्र में बने रहने से दूसरे क्षेत्रों के लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिल पाता. याचिका में सीटों के रोटेशन की व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई गई थी.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण और उनके रोटेशन का मामला विधायी प्रक्रिया और परिसीमन व्यवस्था से जुड़ा है. अदालत ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. CJI की टिप्पणी से यह भी स्पष्ट हुआ कि इस तरह की मांग को लेकर राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से आवाज उठाई जा सकती है.

संविधान के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में SC और ST समुदायों के लिए उनकी जनसंख्या के आधार पर सीटें आरक्षित की जाती हैं. निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण और आरक्षण परिसीमन आयोग की प्रक्रिया के तहत होता है. आरक्षित सीटों के रोटेशन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और संवैधानिक चर्चा का हिस्सा रहा है.