दिल्ली में सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत कृषि भवन परिसर में स्थित 100 साल से अधिक पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने अदालत में मस्जिद हटाने के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि सरकारी कार्यालय परिसर का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप बनाए रखना जरूरी है।

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केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट परिसर प्रशासनिक एवं सार्वजनिक सेवाओं के लिए हैं। सरकारी संपत्ति पर स्थायी धार्मिक ढांचे को बनाए रखना उसके धर्मनिरपेक्ष चरित्र के अनुरूप नहीं है। सरकार के मुताबिक, सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन को हटाकर नए सरकारी कार्यालय बनाए जाने हैं।

केंद्र ने यह भी कहा कि मस्जिद समिति को 8 नवंबर 1940 के समझौते के तहत केवल अनुमति के आधार पर परिसर में जगह मिली थी। इस समझौते से समिति को जमीन पर स्वामित्व या कोई स्थायी अधिकार नहीं मिला। सरकार ने मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने की मांग का भी विरोध किया है। उसका कहना है कि करीब दो किलोमीटर के दायरे में दूसरी मस्जिद मौजूद है।

वहीं, मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति ने अदालत में मांग की है कि पुनर्विकास परियोजना के बावजूद नमाज पढ़ने की सुविधा जारी रखी जाए। समिति का कहना है कि वह परियोजना रोकने की मांग नहीं कर रही, बल्कि प्रार्थना के लिए उचित व्यवस्था चाहती है।

2 नवंबर को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या सरकारी परिसर में किसी समुदाय के लिए प्रार्थना स्थल उपलब्ध कराने पर रोक लगाने वाले नियम हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।