2029 के लोकसभा चुनाव में अभी करीब तीन साल का समय बाकी है, लेकिन उसकी सियासी जमीन 2027 में ही तैयार होने लगेगी. अगले साल देश के सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश की कुल 940 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और विपक्ष के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. इन राज्यों में कुल 132 लोकसभा सीटें भी हैं, जो 2029 के चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

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इन सात राज्यों में बीजेपी पांच राज्यों में सत्ता में है, जबकि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है. बीजेपी के लिए इन राज्यों में अपना राजनीतिक दबदबा बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी. वहीं विपक्ष के लिए सत्ता में वापसी और अपनी ताकत बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण मौका है.

सबसे ज्यादा नजर उत्तर प्रदेश और गुजरात पर रहेगी. उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और यहां का चुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में झटका लगा था, जबकि समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और अखिलेश यादव की रणनीति की परीक्षा होगी.

गुजरात भी बीजेपी के लिए बेहद अहम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के गृह राज्य में पार्टी लंबे समय से सत्ता में है. यहां चुनावी प्रदर्शन बीजेपी के राष्ट्रीय राजनीतिक प्रभाव का संकेत देगा.

पंजाब में आम आदमी पार्टी के सामने अपनी सरकार बचाने की चुनौती होगी. कांग्रेस यहां वापसी की कोशिश करेगी, जबकि उत्तराखंड, गोवा और हिमाचल प्रदेश में सत्ता और विपक्ष के बीच मुकाबला दिलचस्प रहने वाला है. मणिपुर में चुनाव के दौरान हिंसा और राजनीतिक स्थिरता जैसे मुद्दे अहम रहेंगे.

इन सात राज्यों के चुनाव सीधे 2029 में प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला नहीं करेंगे. लेकिन इनके नतीजे बीजेपी और विपक्ष की रणनीति, गठबंधन और राजनीतिक आत्मविश्वास को प्रभावित करेंगे. इसलिए 2027 के विधानसभा चुनाव को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़े सियासी टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है.