शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत अपनी नई किताब 'बोध कीर्तन' को लेकर चर्चा में हैं। किताब के कुछ अंश सामने आने के बाद राजनीतिक और कारोबारी जगत में हलचल शुरू हो गई है। इसमें राउत ने एक तरफ कारोबारी विजय माल्या का बचाव किया है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गैर-राजनीतिक भाषणों की तारीफ भी की है।
किताब के 'माल्या ची गोष्ट' यानी माल्या की कहानी नाम के अध्याय में संजय राउत ने लिखा है कि वह विजय माल्या को व्यक्तिगत रूप से जानते थे। संसद और सेंट्रल हॉल में दोनों की मुलाकात होती थी। राउत के मुताबिक, माल्या मिलनसार, हंसमुख और उदार स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने माल्या की आलीशान जीवनशैली को उनके कारोबार का हिस्सा बताया और कहा कि उनकी नीयत किसी को धोखा देने की नहीं थी।
राउत ने माल्या को भगोड़ा कहे जाने पर भी असहमति जताई है। उनका कहना है कि जब माल्या का कारोबार मुश्किल में आया और कर्ज बकाया रह गया, तब बैंकों को उनकी मदद करनी चाहिए थी। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए और कहा कि माल्या को कर्ज माफी नहीं, बल्कि कुछ राहत की जरूरत थी।
हालांकि, राउत की यह निजी राय है। विजय माल्या को 2019 में भारत में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। उनके खिलाफ कर्ज चूक और धनशोधन से जुड़े मामले भी हैं।
किताब के 'दीपस्तंभ' अध्याय में राउत ने पीएम मोदी के भाषणों पर भी विचार रखे हैं। उन्होंने राजनीतिक भाषणों से अलग प्रधानमंत्री के गैर-राजनीतिक संबोधनों की तारीफ की। खास तौर पर अयोध्या के दीपोत्सव में भगवान राम पर दिए गए भाषण को उन्होंने भावुक और प्रभावशाली बताया है।


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