कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची से करीब 99.32 लाख नाम कम होने का मामला चर्चा में है। इस बीच राज्य के मंत्री सतीश जारकीहोली के बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। उनके बयान को राज्य में SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

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SIR से पहले कर्नाटक में करीब 5.54 करोड़ मतदाता दर्ज थे। अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची की जांच की गई और अनुपस्थित, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके, मृत तथा डुप्लीकेट मतदाताओं की प्रविष्टियों की समीक्षा की गई।

मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि हटाए गए नामों में कितने मतदाता वास्तव में अपात्र थे और कितने लोग दस्तावेजों या अन्य कारणों से सूची से बाहर हुए। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत प्रविष्टियों को हटाना है। हालांकि, किसी नाम का सूची से हटना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति मतदान के लिए अपात्र था।

इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच भी बहस जारी है। कांग्रेस नेताओं ने पहले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। ऐसे में सतीश जारकीहोली के बयान को समझने के लिए उनके पूरे बयान और निर्वाचन अधिकारियों के आधिकारिक आंकड़ों को साथ देखना जरूरी है। મતदाता सूची में किसी भी तरह की त्रुटि होने पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए सुधार कराया जा सकता है।