रूस में नौकरी करने गए पांच भारतीयों के रूसी सेना में कथित तौर पर धोखे से भर्ती होने का मामला सामने आया है। इन युवकों ने वीडियो संदेश जारी कर भारत सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील की है। उनका दावा है कि उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास युद्ध क्षेत्र में भेजा जा रहा है और उनकी जान को खतरा है।

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इनमें विशाखापत्तनम के जे वामसी भी शामिल हैं। वामसी की मां जे अप्पालकोंडा के मुताबिक, उनका बेटा फल पैक करने की नौकरी के लिए रूस गया था, लेकिन वहां उसे काम नहीं मिला। इसके बाद उसकी मुलाकात नेपाल के एक नागरिक से हुई, जिसने बेहतर वेतन वाली नौकरी दिलाने का वादा किया।

युवकों का आरोप है कि उन्हें रूसी सेना में खाना पैक करने का काम देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उन्हें सेना में भर्ती कर लिया गया। उनका दावा है कि उनसे रूसी भाषा में लिखे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिन्हें वे समझ नहीं पाए। उन्हें रूसी नागरिकता दिए जाने की जानकारी भी नहीं थी।

वीडियो में युवकों ने कहा कि उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास मोर्चे पर भेजा जा रहा है। उन्होंने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर सुरक्षित वापस लाने की अपील की।

वामसी की मां ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मंत्री नारा लोकेश से मदद मांगी है। नारा लोकेश ने अधिकारियों से समन्वय कर युवकों की सुरक्षित और जल्द वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।