भारत में पेट्रोल के विकल्प के तौर पर इथेनॉल को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है। इसी दिशा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की। इसके तहत E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को भी नियमों में जगह दी गई है। हालांकि, इस फैसले के बाद देश में इथेनॉल की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा कि अगर 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को अनुमति दी जा रही है, तो उनके लिए पर्याप्त ईंधन की सप्लाई कैसे सुनिश्चित होगी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि इसके लिए बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन व्यवस्था में बदलाव करने होंगे। वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है।
E85 फ्यूल में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E100 में लगभग पूरी मात्रा इथेनॉल की होती है। इन ईंधनों के लिए खास तकनीक से तैयार फ्लेक्स-फ्यूल वाहन जरूरी हैं। सामान्य पेट्रोल या E20 गाड़ियों में सीधे E100 इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण और किसानों के हितों पर भी ध्यान देने की बात कही। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की है।


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