मेटा अब भारत में अपने प्लेटफॉर्म पर सामने आने वाले बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे भारतीय साइबर अधिकारियों को करने की व्यवस्था शुरू करेगा। कंपनी ने यह कदम इंस्टाग्राम पर बाल शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले कथित पेड विज्ञापनों को लेकर हुई जांच और भारतीय अधिकारियों की कार्रवाई के बाद उठाया है।
बीबीसी की एक जांच में जुलाई 2026 में सामने आया था कि इंस्टाग्राम पर भारत में बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन चलाए जा रहे थे। रिपोर्ट के बाद भारतीय सरकार ने मेटा को ऐसे विज्ञापनों और सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया था।

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मेटा के प्रवक्ता के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा कंपनी की प्राथमिकता है। कंपनी ने बताया कि वह अब बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करेगी। I4C केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करता है।


हालांकि, मेटा ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि सीधे रिपोर्टिंग की व्यवस्था कब से शुरू होगी, किन मामलों को इसमें शामिल किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया किस तरह काम करेगी।
मेटा के मुताबिक, अब तक स्पष्ट बाल शोषण मामलों की जानकारी मिलने पर वह अपने कानूनी दायित्वों के तहत अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) को रिपोर्ट करती रही है। NCMEC संबंधित रिपोर्टों को दूसरे देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाता है।


यह बदलाव भारतीय अधिकारियों और बाल अधिकार संगठनों की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर CSAM के प्रसार और उससे जुड़े कथित आर्थिक लाभ को लेकर उठाई गई चिंताओं के बाद आया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी मामले का संज्ञान लेकर मेटा से जवाब और दस्तावेज मांगे थे। इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संबंधित सरकारी मंत्रालयों को नोटिस जारी कर प्लेटफॉर्म की भूमिका की जांच की है।


बाल अधिकार संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी सामग्री से जुड़े लोगों की पहचान कर भारतीय अधिकारियों को जानकारी देने का निर्देश देने की मांग की है।