जम्मू के नरवाल इलाके में प्रशासन की कार्रवाई के बीच रोहिंग्या परिवारों ने अपनी अस्थायी झोपड़ियां और कुछ दुकानें हटाना शुरू कर दिया है। यह कदम उन भूखंड मालिकों को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद सामने आया है, जिनकी जमीन पर ये अस्थायी ढांचे बने हुए थे। नोटिस में जमीन से झुग्गियों और अन्य संरचनाओं को हटाने के लिए कहा गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, नरवाल में मंगलवार से परिवारों ने अपने ठिकाने खाली करने शुरू किए और बुधवार को भी यह प्रक्रिया जारी रही। सामने आए दृश्यों में लोग झोपड़ियां तोड़ते, घरेलू सामान समेटते और वहां से जाने की तैयारी करते नजर आए। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जमीन खाली करने के बाद ये परिवार कहां जाएंगे।
यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या बस्तियों और कथित विदेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर बढ़ी प्रशासनिक जांच के बीच हुई है। अगस्त में जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच के लिए गठित केंद्र की उच्चस्तरीय समिति ने नरवाल की एक रोहिंग्या बस्ती का दौरा भी किया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 7,656 रोहिंग्याओं की पहचान की गई है, जिनमें 6,737 जम्मू संभाग के 10 जिलों में बताए गए हैं।
कुछ परिवारों ने कहा है कि वे म्यांमार वापस नहीं लौट सकते और वहां भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में उनके सामने आगे रहने की जगह को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। प्रशासन की ओर से फिलहाल बस्तियों की जांच और संबंधित जमीनों को लेकर कार्रवाई जारी रहने की बात सामने आई है।



0 comments
No comments yet. Yours would be the first.