कर्नाटक सरकार ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की दिशा में जमीन से जुड़ी प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 31 अक्टूबर को बताया कि परियोजना के लिए अब तक 2500 एकड़ जमीन की पहचान की जा चुकी है। इसमें वन भूमि के बदले दी जाने वाली वैकल्पिक जमीन भी शामिल है। बाकी जमीन की पहचान करने का काम जारी है।

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इस परियोजना के तहत कावेरी नदी पर 66 TMC पानी की क्षमता वाला जलाशय बनाने की योजना है। इसका उद्देश्य पानी का भंडारण करना और जरूरत के समय उसकी आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इससे बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में पेयजल की जरूरत पूरी करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा परियोजना से 400 मेगावाट बिजली उत्पादन की भी योजना बनाई गई है।

डीके शिवकुमार के मुताबिक, परियोजना के लिए करीब 500 एकड़ किसानों की निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। वहीं, वन विभाग से जुड़ी जमीन के बदले वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके लिए एक समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता मंड्या के डिप्टी कमिश्नर कर रहे हैं।

हालांकि, मेकेदातु परियोजना को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। तमिलनाडु को आशंका है कि जलाशय बनने से उसके हिस्से के कावेरी नदी के पानी पर असर पड़ सकता है। इस परियोजना के लिए वन और पर्यावरण संबंधी मंजूरियां हासिल करना भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में जमीन की पहचान के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी मंजूरियों पर ध्यान दिया जा रहा है।