फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। सोमवार को चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस दावे को भ्रामक बताया, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव करने का आरोप लगाया था। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मूल फॉर्म-6 में एक कॉमा या फुल स्टॉप तक नहीं बदला गया है।

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आयोग के मुताबिक, बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। यह व्यवस्था 24 जून 2025 को जारी बिहार SIR के आदेश के तहत लागू की गई थी। EC का कहना है कि इस घोषणा-पत्र को मूल फॉर्म-6 में बदलाव नहीं माना जा सकता।


यह विवाद तब और बढ़ा जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसने फॉर्म-6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड सामने आने पर वह देखना चाहेगा कि बदलाव किसने किया।


इसके बाद चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ जोड़ा गया घोषणा-पत्र पहले से तय प्रोटोकॉल का हिस्सा था। आयोग ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR से जुड़े इस प्रोटोकॉल को अपने 27 मई 2026 के फैसले में बरकरार रखा था।


राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि फॉर्म-6 में बदलाव कर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हुई। वहीं EC ने उनके बयान को तथ्यात्मक रूप से भ्रामक बताया है।