दिल्ली की 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने केंद्र को हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह तय की गई है और वहां पूरी किताबों का संग्रह रखा जा सकेगा या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने प्रस्तावित जगह का वास्तविक लेआउट प्लान भी मांगा है। अदालत ने खास तौर पर पूछा कि नई जगह में शास्त्री भवन में मौजूद किताबों के साथ-साथ आरके पुरम में रखी करीब 2 लाख किताबों को भी रखा जा सकेगा या नहीं। कोर्ट ने केंद्र को तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह लाइब्रेरी साल 1891 में स्थापित हुई थी और फिलहाल शास्त्री भवन में चार मंजिलों पर करीब 5,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में है। इसमें 8.5 लाख से ज्यादा किताबें, दुर्लभ पुस्तकें, सरकारी प्रकाशन और ऐतिहासिक रिकॉर्ड मौजूद हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, कर्तव्य भवन-2 में शुरुआत में लाइब्रेरी के लिए करीब 300 वर्ग मीटर की दो कमरों वाली जगह प्रस्तावित की गई थी। संस्कृति मंत्रालय ने इसे पूरी लाइब्रेरी और उसके संग्रह के लिए अपर्याप्त बताया था। वहीं आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय का कहना है कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना में जगह का प्रावधान किया गया है और निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।



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