पश्चिम बंगाल की अन्नपूर्णा योजना को लेकर राज्य के कई हिस्सों में महिलाओं का विरोध प्रदर्शन सामने आया है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹3,000 की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। हालांकि, कई महिलाओं ने भुगतान नहीं मिलने या आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद राशि खाते में नहीं आने की शिकायत की।


मालदा की 32 वर्षीय अनीता खातून का मामला भी इसी विवाद के बीच सामने आया। परिवार के अनुसार, अनीता को योजना के तहत एक बार राशि मिली थी, लेकिन इसके बाद भुगतान में कथित देरी हुई। परिवार ने आर्थिक परेशानी को उनकी मौत से पहले की परिस्थितियों से जोड़ा है। हालांकि, उनकी मौत का कारण केवल योजना के भुगतान में देरी को मानना उचित नहीं होगा।


अगस्त में भुगतान को लेकर राज्य के कई इलाकों में महिलाओं ने प्रदर्शन किया। उत्तर 24 परगना में महिलाओं द्वारा रेलवे ट्रैक रोकने की घटना भी सामने आई, जबकि कुछ जगहों पर अधिकारियों और मंत्रियों के सामने भी शिकायतें रखी गईं।


विवाद के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सभी पात्र महिलाओं को योजना का लाभ दिया जाएगा। अगस्त में करीब 1.45 करोड़ महिलाओं को ₹3,000 की राशि दिए जाने की जानकारी सरकार की ओर से दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन पात्र महिलाओं के आवेदन छूट गए हैं, उन्हें दोबारा आवेदन का मौका दिया जाएगा।


सरकार के अनुसार, भुगतान में समस्या का एक कारण दस्तावेजों या बैंक-DBT से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी भी हो सकती है। सितंबर में योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर करीब 1.58 करोड़ किए जाने की जानकारी सामने आई।


अन्नपूर्णा योजना का विवाद अब सिर्फ भुगतान तक सीमित नहीं है। इससे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में पात्रता जांच, आवेदन प्रक्रिया और समय पर भुगतान को लेकर भी सवाल उठे हैं। आने वाले समय में सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना अहम होगा कि पात्र महिलाओं तक सहायता नियमित रूप से पहुंचे।