तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 17 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की पहले के आदेश को वापस लेने की मांग ठुकरा दी और हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए उपयुक्त जमीन पहचानने को तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया।


मामले का मुख्य विवाद नवोदय विद्यालयों की शिक्षा और भाषा नीति को लेकर है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से राज्य की दो-भाषा नीति का हवाला देते हुए इन स्कूलों की स्थापना का विरोध करती रही है। राज्य का कहना है कि शिक्षा समवर्ती सूची में है और केंद्र की किसी योजना को लागू करते समय राज्य की मौजूदा नीतियों और कानूनों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।


दूसरी ओर, नवोदय विद्यालय ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली छात्रों को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। केंद्र ने स्कूलों के निर्माण और बुनियादी ढांचे के लिए धन देने की बात कही है, जबकि जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य की है।


सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र और तमिलनाडु के प्रतिनिधियों से आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने को कहा। सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने तमिलनाडु के हिंदी को लेकर रुख पर भी सवाल उठाए और राज्य से अपनी सोच पर पुनर्विचार करने को कहा।


हालांकि, तमिलनाडु का कहना है कि उसका विरोध केवल हिंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की शिक्षा नीति, भाषा नीति और संघीय अधिकारों से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।