पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव से पहले शुक्रवार को राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला। ममता बनर्जी के खेमे की तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। यह फैसला उन्होंने मुख्यमंत्री और नंदीग्राम के मौजूदा विधायक सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के कुछ घंटे बाद लिया।


संचिता प्रधान डे ने नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय में सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम उपचुनाव की दौड़ से हटने का फैसला किया। हालांकि, उनकी मुलाकात और नाम वापस लेने के बीच किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


उम्मीदवारी वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने घोषणा की कि उनका खेमा नंदीग्राम से कोई नया उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। उन्होंने भारत गठबंधन के साथ एकजुटता की बात भी कही।


इसी दिन चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अस्थायी नाम और नए चुनाव चिन्ह आवंटित किए। ममता बनर्जी के खेमे को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और दूसरे गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया गया।


इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर ने नंदीग्राम उपचुनाव को और चर्चा में ला दिया। कांग्रेस के अनुसार, उन्हें 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया।


नंदीग्राम का बंगाल की राजनीति में खास महत्व रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला हुआ था। आगामी उपचुनाव में एक बार फिर दोनों नेताओं से जुड़े राजनीतिक खेमे आमने-सामने हैं।