बिहार की राजनीति में अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निकाले जाने का मामला चर्चा में है। पार्टी ने मोकामा से विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इस कार्रवाई के पीछे पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार और नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी को प्रमुख वजह बताया गया है।

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JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को सुलझाने के लिए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की भूमिका का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी ने ललन सिंह को दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी थी। ललन सिंह ने भी अनंत सिंह से बातचीत की थी और उनसे पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देने का अनुरोध किया था।

विवाद की जड़ पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव था। JDU ने यहां अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य और पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। वहीं, अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन किया और उनके पक्ष में प्रचार किया। अनंत सिंह का आरोप था कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनके खिलाफ काम किया था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 24 अक्टूबर को अनंत सिंह को पार्टी से निकालने का फैसला सामने आया। रिपोर्टों में बताया गया कि निष्कासन से पहले नीतीश कुमार और ललन सिंह के बीच मुलाकात हुई थी। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद थे।

इस पूरे घटनाक्रम ने JDU के भीतर अनुशासन और नेताओं के बीच मतभेदों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, निष्कासन की आधिकारिक घोषणा बिहार JDU अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से की गई थी।