वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष का असर अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास निकाय UNCTAD ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है। UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की आर्थिक विकास दर 2025 में 2.9 प्रतिशत थी, जो 2026 में घटकर 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
इस संकट की बड़ी वजह कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी है। वेस्ट एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर दबाव बढ़ा है। इसका असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। महंगी ऊर्जा से कंपनियों की उत्पादन लागत और परिवहन खर्च बढ़ सकते हैं। इसका बोझ आम लोगों पर भी पड़ सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच एशिया से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। UNCTAD के अनुसार, 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास में एशिया का योगदान 59 प्रतिशत रहने का अनुमान है। भारत की विकास दर 7.3 प्रतिशत, चीन की 4.5 प्रतिशत और इंडोनेशिया की 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
रिपोर्ट में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े वित्तीय जोखिमों पर भी चिंता जताई गई है। AI से जुड़े उत्पाद वैश्विक व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन इसका लाभ सभी क्षेत्रों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा। ऐसे में ऊर्जा की कीमतों, वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक हालात पर दुनिया की अर्थव्यवस्था की दिशा निर्भर करेगी।



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