उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 95 हजार से अधिक मतदाताओं को अपात्र चिह्नित किया गया है। इस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने अनियमितताओं का आरोप लगाया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने गुरुवार को मामले में स्पष्टीकरण जारी किया।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान करीब 1.73 लाख फॉर्म-7 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 95 हजार से अधिक आवेदन ऐसे मतदाताओं से संबंधित हैं, जो आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके या सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए।
संबंधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा अपात्र चिह्नित किए जाने के बाद ऑनलाइन प्रणाली ने उनके नाम हटाने के लिए स्वतः फॉर्म-7 तैयार किए। यह फॉर्म मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
उत्तराखंड में मतदाता सूची का मसौदा 14 जुलाई को प्रकाशित हुआ था। फिलहाल दावों और आपत्तियों की सुनवाई जारी है। अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।
कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 42,030 आवेदन सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और 22,443 आवेदन निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों से जुड़े हैं। उन्होंने अधिकारियों के नाम पर आवेदन तैयार होने का आधार स्पष्ट करने की मांग की।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो रही है। राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया कि अपात्र चिह्नित मतदाता अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।



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