भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, गौतम गंभीर और जहीर खान जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के टीम से बाहर होने और संन्यास से जुड़े फैसलों पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों को खुद पता है कि उन्हें टीम छोड़ने या संन्यास लेने की नौबत क्यों आई थी। पाटिल 2012 से 2016 तक भारतीय टीम की पांच सदस्यीय चयन समिति के अध्यक्ष रहे थे।
दूरदर्शन के कार्यक्रम ‘द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो’ में बातचीत के दौरान पाटिल ने स्पष्ट किया कि इन फैसलों की जिम्मेदारी केवल उनकी नहीं थी। चयन समिति के सभी पांच सदस्य मिलकर खिलाड़ियों के चयन से जुड़े निर्णय लेते थे। उन्होंने कहा कि समिति ने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले किए थे।
पाटिल के मुताबिक, चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी देश, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और भारतीय क्रिकेट के हितों को प्राथमिकता देना है। उन्होंने स्वीकार किया कि सचिन, युवराज, गंभीर और जहीर जैसे बड़े खिलाड़ियों के टीम से बाहर होने या संन्यास लेने पर बात करना भावनात्मक रूप से मुश्किल है, लेकिन टीम के भविष्य के लिए कई बार कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।
उन्होंने खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत संबंधों पर भी अपनी राय रखी। पाटिल ने कहा कि चयनकर्ता खिलाड़ियों के दोस्त हो सकते हैं, लेकिन चयन करते समय व्यक्तिगत रिश्तों को प्राथमिकता नहीं दे सकते। उन्होंने समझाया कि किसी खिलाड़ी को केवल दोस्त होने के कारण टीम में जगह देना सही नहीं है।
साल 2011 में भारत के वनडे विश्व कप जीतने के बाद टीम बदलाव के दौर से गुजर रही थी। इस दौरान अनुभवी खिलाड़ियों की जगह युवा क्रिकेटरों को अवसर देने पर जोर दिया गया। पाटिल के ताजा बयान से एक बार फिर भारतीय क्रिकेट में उस बदलाव के दौर और चयनकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा शुरू हो गई है।



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