भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक का फैसला 7 अक्टूबर को आने वाला है। बाजार और कई अर्थशास्त्री 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 फीसदी की रेपो रेट बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी है और 25 bps की बढ़ोतरी के बाद यह 5.50 फीसदी हो सकती है।
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका होम लोन फ्लोटिंग रेट या बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा है। बैंक अगर पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाते हैं तो EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
उदाहरण के तौर पर 50 लाख रुपये के होम लोन पर 7.5 फीसदी ब्याज और 25 साल की अवधि में EMI करीब 36,950 रुपये है। अगर ब्याज दर 25 bps बढ़कर 7.75 फीसदी हो जाती है और पूरी बढ़ोतरी ग्राहक पर लागू होती है, तो EMI लगभग 37,767 रुपये हो सकती है। यानी हर महीने करीब 817 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं।
पूरे 25 साल की अवधि में इस बदलाव से करीब 2.45 लाख रुपये का अतिरिक्त ब्याज बोझ पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक असर बैंक की रीसेट पॉलिसी, बकाया लोन और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा। RBI का अंतिम फैसला आने के बाद ही स्थिति साफ होगी।



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