भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. इसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है. करीब चार साल में यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया है. RBI ने फरवरी 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर में बढ़ोतरी की है.

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रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आगे चलकर ग्राहकों के लोन पर पड़ सकता है. खासतौर पर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन लेने वालों की EMI बढ़ने की संभावना है. इसके अलावा कार लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज भी महंगे हो सकते हैं.


RBI के मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया. साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है. इसका संकेत है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है और आगे फैसला महंगाई और आर्थिक हालात के आधार पर लिया जाएगा.


RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रखा है. वहीं महंगाई को लेकर जोखिम बढ़ने की बात कही गई है. बढ़ती तेल कीमतें और वैश्विक परिस्थितियां भी RBI के फैसले में अहम कारक रही हैं.