जेन Z को बार-बार होने वाले कामों को आसान बनाने के लिए ऑटोमेशन का इस्तेमाल करना पसंद आता है। लेकिन हर छोटे काम को ऑटोमेट करना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। एक रेडिट यूजर ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि कैसे एक साधारण काम को ऑटोमेट करने की कोशिश उसके लिए परेशानी बन गई।
यूजर के मुताबिक, उसका मैनेजर अक्सर मजाक में कहता था कि Gen Z किसी बोरिंग काम को दो बार करने के बाद तीसरी बार उसे ऑटोमेट करने लगती है। यूजर इस सोच से पूरी तरह सहमत नहीं था। उसका मानना था कि अगर कोई दोहराया जाने वाला काम आसानी से ऑटोमेट हो सकता है, तो इससे समय बचाया जा सकता है।
एक दिन उसे कुछ फाइलें तैयार करनी थीं। इसके लिए वह अलग-अलग टूल का इस्तेमाल करता था। उसने सोचा कि क्यों न पूरी प्रक्रिया को एक साथ ऑटोमेट कर दिया जाए। लेकिन एक अजीब फाइल की वजह से ऑटोमेशन सिस्टम काम करना बंद कर गया। इसके बाद वह करीब 20 मिनट तक यह पता लगाने में लगा रहा कि समस्या कहां है।
इसी दौरान उसका मैनेजर वहां से गुजरा और उसे ऑटोमेशन ठीक करने में उलझा देखा। आखिरकार कर्मचारी ने ऑटोमेशन का विचार छोड़कर वही काम मैन्युअली कर लिया, जिसे करने में कुछ ही समय लगा।
इस अनुभव से उसे समझ आया कि ऑटोमेशन उपयोगी है, लेकिन हर छोटे काम के लिए जटिल सिस्टम बनाना जरूरी नहीं। कई बार छोटा काम सीधे करना ही ज्यादा आसान और तेज होता है।



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