न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 3-2 से जीतने के बावजूद भारतीय टीम की कुछ कमजोरियां सामने आई हैं। खासतौर पर गेंदबाजी विभाग का प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला रहा। कई मुकाबलों में भारतीय गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे और विपक्षी बल्लेबाजों ने जमकर रन बनाए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या टीम इंडिया आगामी बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ अपने बल्लेबाजों के दम पर ही मुकाबले जीत पाएगी?

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सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजों को पावरप्ले और डेथ ओवरों में काफी परेशानी हुई। तेज गेंदबाजों के साथ स्पिन विभाग भी हर मैच में प्रभावी नजर नहीं आया। टीम के सामने पांचवें और छठे गेंदबाजी विकल्प को लेकर भी चुनौती बनी हुई है। ऑलराउंडर खिलाड़ियों से जिस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद थी, वे उस पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके।

आंकड़े भी भारतीय गेंदबाजी की चिंता को दिखाते हैं। टी20 वर्ल्ड कप के बाद से भारत कई बार 200 से ज्यादा रन लुटा चुका है। एक कैलेंडर वर्ष में 39 मैचों के दौरान टीम ने 11 बार 200 से अधिक रन दिए हैं। यह गेंदबाजी में सुधार की जरूरत को दर्शाता है।

दूसरी ओर, युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी चयन नीति पर सवाल उठ रहे हैं। 15 साल के इस खिलाड़ी ने सीमित मौकों में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से प्रभावित किया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मैच में उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया था, जबकि इससे पहले उन्होंने 19 गेंदों पर 45 रन की शानदार पारी खेली थी।

टीम मैनेजमेंट नियमित खिलाड़ियों और मौजूदा संयोजन पर भरोसा बनाए रखना चाहता है, लेकिन वैभव को लगातार मौके नहीं मिलने से उनकी भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। अब टीम के सामने बल्लेबाजी की ताकत के साथ गेंदबाजी को भी मजबूत करने की चुनौती है।