प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में वकील रशेश उपाध्याय को गिरफ्तार किया है। उन्हें मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में करीब 28 हजार करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन और 20 राज्यों तक फैले साइबर ठगी नेटवर्क की जांच की जा रही है।

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जांच का एक अहम पहलू उन बैंक खातों से जुड़ा है, जिन्हें साइबर अपराधों में कथित इस्तेमाल के कारण फ्रीज कर दिया गया था। आरोप है कि रशेश उपाध्याय ऐसे खातों को दोबारा खुलवाने में मदद करते थे। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन कैसे किया जाता था और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर लोगों को निवेश, नौकरी या अन्य तरीकों का लालच देकर निशाना बनाते हैं। ठगी से हासिल रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर करके उसकी पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में खाताधारकों, बिचौलियों और रकम के लेनदेन में मदद करने वाले लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आती है।

ED इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों का पता लगाने में जुटी है। करीब 28 हजार करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की प्रकृति, संबंधित बैंक खातों और अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच की जा रही है। हालांकि, कुल ट्रांजैक्शन की राशि को सीधे ठगी की पुष्टि हुई रकम नहीं माना जा सकता। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगी।