दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 में लाखों छात्रों की भागीदारी के बावजूद मतदान का आंकड़ा 50 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका। 18 सितंबर को हुए चुनाव में कुल 40.46 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। यह पिछले साल के 39.45 प्रतिशत के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी है, लेकिन 2023 के करीब 42 प्रतिशत मतदान से अब भी कम है।

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इस साल करीब 1.5 लाख पात्र छात्रों के बीच मतदान हुआ। कुल 52 मतदान केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 40.46 प्रतिशत छात्रों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में छात्र चुनाव प्रक्रिया से दूर रहे।


कम मतदान के पीछे कई कारण सामने आए हैं। कुछ छात्रों ने छात्र राजनीति में बढ़ती नारेबाजी, विवाद और चुनावी गतिविधियों को लेकर असहमति जताई। वहीं, कुछ छात्रों के मुताबिक हॉस्टल, पीजी का किराया, महिला सुरक्षा, लाइब्रेरी और कैंटीन जैसी समस्याएं उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। शुक्रवार को मतदान होने के कारण कुछ बाहरी छात्र सप्ताहांत के लिए घर भी चले गए, जिससे मतदान पर असर पड़ने की बात सामने आई। ये कारण छात्रों और रिपोर्टों में व्यक्त किए गए विचार हैं, इन्हें आधिकारिक कारण नहीं माना जा सकता।


इस बार डूसू चुनाव में लगभग 960 ईवीएम का इस्तेमाल किया गया। मतदान दो चरणों में हुआ—डे कॉलेजों के लिए सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक और ईवनिंग कॉलेजों के लिए शाम 3 बजे से 7:30 बजे तक।