धर्मेंद्र कश्यप ने अपने इस्तीफे में पार्टी के कामकाज के तरीके और पिछड़े तथा अति पिछड़े समाज को उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले कुछ नेताओं को महत्व दिया जा रहा है, जबकि पिछड़े वर्ग के नेताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा है।

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उनकी नाराजगी की चर्चा बीजेपी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद बढ़ी थी। धर्मेंद्र कश्यप को इस बार राज्यसभा का टिकट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर पोस्ट साझा की थी। अब पार्टी से इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम पर सबकी नजर है।


धर्मेंद्र कश्यप आंवला लोकसभा सीट से 2014 और 2019 में बीजेपी के टिकट पर सांसद चुने गए थे। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इससे पहले वह समाजवादी पार्टी से भी जुड़े रहे थे और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।


अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सपा में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा की पुष्टि जरूरी है। ऐसे में उनके अगले फैसले पर सभी की नजर बनी हुई है।