देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर आज विरोध-प्रदर्शन के लिए सबसे चर्चित जगहों में शामिल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले बड़े धरने और आंदोलन कहां हुआ करते थे? जंतर-मंतर से पहले दिल्ली का बोट क्लब प्रदर्शनकारियों का प्रमुख ठिकाना था। यह जगह इंडिया गेट के पास स्थित है और सेंट्रल दिल्ली के महत्वपूर्ण इलाकों में आती है।
बोट क्लब का नाम खास तौर पर 1988 के बड़े किसान आंदोलन के बाद चर्चा में आया। 25 अक्टूबर 1988 से करीब एक सप्ताह तक किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान यहां जुटे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब पांच लाख किसानों ने बोट क्लब के लॉन में डेरा डाला था। इस आंदोलन के बाद बोट क्लब दिल्ली के बड़े विरोध प्रदर्शनों का प्रतीक बन गया।
इसके बाद बड़े जमावड़ों और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए बोट क्लब पर प्रतिबंध लगाए गए। 1990 के दशक की शुरुआत में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शनों के लिए प्रमुख जगह के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। इसकी एक वजह यह भी थी कि यह संसद के करीब है, लेकिन यहां बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान माना गया।
2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को रोकने का आदेश दिया था, लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यहां प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। हालांकि, प्रदर्शन संख्या और आयोजन के तरीके को लेकर नियम लागू किए जा सकते हैं।



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