डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। 1 अक्टूबर को रुपया 0.5 फीसदी गिरकर 96.3150 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो करीब दो महीने का निचला स्तर है। रुपये की कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे कारण बताए जा रहे हैं।

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कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, रुपया जल्द ही 97 प्रति डॉलर का स्तर छू सकता है। उन्होंने कहा कि अगर 97 का स्तर टूटता है तो रुपया 99 तक भी फिसल सकता है। उनके मुताबिक ऐसे हालात में बाजार पर दबाव बढ़ने के साथ महंगाई की चिंता भी बढ़ सकती है।


रुपये पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी असर पड़ रहा है। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर की शुरुआत तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से करीब 6.1 अरब डॉलर निकाल चुके थे। साथ ही, पिछले दो महीनों में आया करीब 90 फीसदी विदेशी निवेश वापस निकलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।


कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारत के लिए चुनौती है, क्योंकि इससे देश का आयात बिल बढ़ता है। 1 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया था। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी 5.34 फीसदी तक पहुंच गई, जिससे डॉलर की मांग मजबूत हुई और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा।