मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने OBC क्रीमी लेयर को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अभ्यर्थी को सिर्फ उसके माता-पिता की सैलरी या सालाना आय के आधार पर क्रीमी लेयर में शामिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता के पद, सेवा की स्थिति, प्रमोशन और लागू सरकारी नियमों को भी देखना जरूरी है।
यह मामला अशोकनगर की रागिनी राठौर से जुड़ा है। रागिनी ने गैर-क्रीमी लेयर श्रेणी में OBC प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। अधिकारियों ने उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनके पिता की सालाना सैलरी करीब 16.99 लाख रुपये है। अधिकारियों ने 8 लाख रुपये की निर्धारित आय सीमा का हवाला देते हुए उन्हें क्रीमी लेयर में माना था।
मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर अदालत ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी के मामले में क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल बैंक खाते में आने वाली सैलरी के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता का सेवा स्तर, पद और प्रमोशन किस समय हुआ, इन पहलुओं की भी जांच जरूरी है।
हाईकोर्ट ने संबंधित सक्षम अधिकारी को रागिनी के OBC प्रमाण पत्र के आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। अधिकारी को सभी प्रासंगिक तथ्यों और सरकारी दिशानिर्देशों की जांच के बाद नया आदेश जारी करना होगा।


