दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा था. बड़ी-बड़ी कंपनियों ने इस तकनीक को विकसित करने और इसके जरिए कारोबार बढ़ाने के लिए खरबों डॉलर का निवेश किया. लेकिन अब AI को लेकर निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता नजर आ रहा है. अमेरिका से लेकर चीन तक AI कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है.

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अमेरिका में AI स्टॉक्स की बिकवाली ने शेयर बाजार को बड़ा झटका दिया है. 5 नवंबर को नैस्डैक-100 में करीब 6.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर की मार्केट वैल्यू खत्म हो गई. निवेशकों को चिंता है कि डेटा सेंटर, चिप और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे भारी खर्च के मुकाबले कंपनियों को पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल रहा है.

चीन में भी AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर दबाव में हैं. वहां AI और चिप कंपनियों के प्रमुख इंडेक्स STAR50 में कुछ महीनों के भीतर लगभग 40 फीसदी की गिरावट आई है. इससे चीन के तकनीकी बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.

इस संकट की सबसे बड़ी वजह AI पर बढ़ता खर्च और उससे होने वाली कमाई के बीच अंतर है. कंपनियां AI मॉडल, डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने के लिए लगातार पैसा लगा रही हैं. कई कंपनियां कर्ज लेकर भी निवेश कर रही हैं. ऐसे में निवेशकों का सवाल है कि आखिर इन खर्चों से टिकाऊ मुनाफा कब मिलेगा.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि AI तकनीक खत्म हो रही है. फिलहाल संकट AI के भविष्य से ज्यादा उसके कारोबार और निवेश की कीमत को लेकर है. आने वाले समय में कंपनियों को यह साबित करना होगा कि AI सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि कमाई का टिकाऊ जरिया भी बन सकता है.