ईरान युद्ध का असर अब अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, देश के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में कच्चे तेल का भंडार घटकर करीब 28.27 करोड़ बैरल रह गया है। यह अक्टूबर 1982 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व किसी आपात स्थिति में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में इस भंडार से तेल जारी किया जा सकता है। लेकिन लगातार तेल निकालने से अब इस रिजर्व में उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा काफी कम हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय तेल जारी करने की योजना के तहत अपने रिजर्व से कुल 17.2 करोड़ बैरल तेल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई थी। ईरान युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति पर दबाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह कदम उठाया गया। इससे बाजार को अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है, लेकिन अमेरिकी आपात भंडार का स्तर घट गया है।

अब ट्रंप प्रशासन के सामने चुनौती है कि तेल की कीमतों और सप्लाई को संभालने के साथ-साथ रिजर्व को दोबारा कैसे भरा जाए। हालांकि, तेल भंडार को फिर से मजबूत करने में समय लग सकता है। इसके लिए तेल की उपलब्धता, खरीद की लागत और भंडारण व्यवस्था जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होगा।

अमेरिका में रिजर्व का कम होना यह भी दिखाता है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का असर ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित रहती है, तो तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, कीमतों की दिशा वैश्विक मांग, उत्पादन और युद्ध की स्थिति जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।