तिब्बत में 7 मैग्नीट्यूड का शक्तिशाली भूकंप आने के बाद हिमालयी क्षेत्र में बड़े भूकंप के खतरे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस भूकंप के बाद 17-18 आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटके दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के लगातार टकराने से हिमालय के नीचे दबाव जमा होता रहता है। जब यह दबाव चट्टानों की सहन करने की क्षमता से ज्यादा हो जाता है, तो जमीन में अचानक हलचल होती है और भूकंप आ सकता है।

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हिमालय दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल है। भारतीय प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इस प्रक्रिया के कारण जमीन के नीचे तनाव पैदा होता है। कई जगह यह तनाव लंबे समय तक जमा रह सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिक हिमालय में बड़े भूकंप की आशंका को गंभीरता से लेते हैं।

भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक इस बात का संकेत होते हैं कि जमीन के नीचे चट्टानों में बदलाव की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, इन झटकों की संख्या के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि आगे कोई और बड़ा भूकंप आएगा या नहीं।

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और हिमालय के आसपास के कई इलाके भूकंप के लिहाज से संवेदनशील हैं। देहरादून, चमोली और उत्तरकाशी जैसे क्षेत्रों में भूकंप के जोखिम को देखते हुए वैज्ञानिक लगातार अध्ययन करते हैं। बड़े भूकंप से इमारतों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, विज्ञान अभी यह सटीक रूप से नहीं बता सकता कि भूकंप कब, कहां और कितनी तीव्रता का आएगा। इसलिए हिमालयी क्षेत्रों में भूकंपरोधी निर्माण, आपदा प्रबंधन की तैयारी और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।