सऊदी अरब के अनुरोध के बाद चीन ने कथित तौर पर ईरान से हौथी विद्रोहियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और उनके हमलों पर लगाम लगाने का आग्रह किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लाल सागर और बाब अल-मंडेब के आसपास सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी अरब ने चीन से ईरान पर दबाव बनाने की अपील की थी, क्योंकि हौथियों की गतिविधियों और हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर भी खतरा बढ़ रहा है। इसके बाद चीन ने निजी तौर पर तेहरान से कहा कि वह हौथियों को संघर्ष को महत्वपूर्ण समुद्री और ऊर्जा मार्गों तक फैलने से रोकने के लिए प्रभावित करे।
चीन ने सार्वजनिक रूप से क्षेत्र में संयम, बातचीत और सुरक्षित नौवहन बहाल करने का समर्थन किया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक निजी संदेश में ईरान के खिलाफ किसी आर्थिक कार्रवाई की स्पष्ट धमकी नहीं दी गई। यह भी स्पष्ट नहीं है कि चीन का संदेश किस माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया और क्या इस मुद्दे पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची की चीन यात्रा के दौरान चर्चा हुई थी।
उधर, अमेरिका ने ओमान में हौथी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से फिलहाल दूरी बनाए रखी है। पाकिस्तान ने भी प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है।
चीन के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार और उसके तेल का बड़ा खरीदार है। 2023 में चीन ने ईरान और सऊदी अरब के बीच राजनयिक संबंध बहाल कराने में भी मध्यस्थता की थी।



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