रूस ने अमेरिका के प्रस्तावित नए प्रतिबंधों को लेकर चेतावनी दी है। क्रेमलिन के मुताबिक, रूस पर अतिरिक्त अमेरिकी प्रतिबंध यूक्रेन शांति समझौते तक पहुंचने की कोशिशों को और मुश्किल बना सकते हैं। अब इस विधेयक पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का इंतजार है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक की प्रगति पर नजर रख रहा है। उन्होंने नए प्रतिबंधों को शत्रुतापूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे यूक्रेन में शांति समझौते की कोशिशों में जटिलताएं पैदा होंगी।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले विधेयक को 262-159 वोटों से पारित किया है। इससे पहले सीनेट ने इसे 86-11 वोटों से मंजूरी दी थी। अब यह विधेयक ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है।
प्रस्तावित कानून में रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के अलावा उसके तेल टैंकरों के नेटवर्क को निशाना बनाने की बात कही गई है। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी है।
इस प्रस्ताव पर भारत और चीन ने आपत्ति जताई है। चीन ने ऐसे कदमों का विरोध किया है, जबकि भारत ने कहा है कि रूस से तेल खरीद पर नए अमेरिकी टैरिफ का असर द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहा है। ऐसे में ट्रंप का फैसला शांति वार्ता और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।



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