भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए कदमों का असर भारतीय रुपये पर दिखाई देने लगा है। सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 1 फीसदी मजबूत होकर 95.77 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार को रुपया 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये में आई यह तेजी पिछले छह महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त में से एक रही। इसका मुख्य कारण डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए RBI की ओर से उठाए गए नए कदम हैं।

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RBI ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को नामित बैंकों के माध्यम से डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह व्यवस्था 12 अक्टूबर से लागू हुई है और अगले आदेश तक जारी रहेगी। इससे इन कंपनियों की डॉलर खरीद सामान्य हाजिर बाजार से हट जाएगी और बाजार में डॉलर की मांग का दबाव कम हो सकता है।

केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियमों को भी सख्त किया है। बिना वास्तविक कारोबारी जोखिम के विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदे करने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है। इसके अलावा, कुछ रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा सौदों पर अतिरिक्त रिजर्व रखने और रद्द किए गए अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।

इन उपायों का उद्देश्य रुपये में तेज उतार-चढ़ाव और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना है। हालांकि, रुपये की मजबूती लंबे समय तक बनी रहेगी या नहीं, यह कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश और डॉलर की वैश्विक चाल पर निर्भर करेगा।