फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन ने राफेल लड़ाकू विमानों में भारतीय हथियारों और स्वदेशी सिस्टम को इंटीग्रेट करने पर सहमति जताई है। यह कदम भारतीय वायुसेना के 114 राफेल विमानों की प्रस्तावित खरीद के लिए अहम माना जा रहा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारतीय हथियारों को राफेल के साथ जोड़ने को लेकर पहले तकनीकी और सोर्स कोड से जुड़ी चुनौतियां थीं, लेकिन अब दोनों पक्षों के बीच इस दिशा में सहमति बनी है।
रिपोर्ट के अनुसार, राफेल में अस्त्र Mk-1 और Mk-2 BVR मिसाइल, रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल और SAAW जैसे स्वदेशी हथियारों को शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा DRDO के दूसरे हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को भी विमान के साथ जोड़ने की योजना है।
भारत का उद्देश्य विदेशी लड़ाकू विमान पर स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल की क्षमता बढ़ाना और विदेशी हथियार प्रणालियों पर निर्भरता कम करना है। इसके लिए पूरे सोर्स कोड की जगह इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) जैसे तकनीकी विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है।
114 राफेल की प्रस्तावित डील की कीमत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। बातचीत में 50-60 फीसदी मेक इन इंडिया कंटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में MRO सुविधा जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। डील को मार्च 2027 तक अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई गई है।



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