नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) पेमेंट डिफॉल्ट मामले में निवेशकों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। मुंबई की विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अटैच की गई करीब 3,464 करोड़ रुपये की संपत्तियों को बेचने की अनुमति दे दी है। इस प्रक्रिया से पहले चरण में 5,682 निर्धारित लेनदारों के लिए 1,950 करोड़ रुपये के सेटलमेंट का रास्ता साफ हुआ है।
अदालत ने यह आदेश 8 अक्टूबर 2026 को दिया था। इसके तहत संपत्तियों की बिक्री से मिलने वाली 1,950 करोड़ रुपये तक की रकम 63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को दी जाएगी। कंपनी संबंधित लेनदारों की ओर से यह रकम प्राप्त करेगी। हालांकि, भुगतान NCLT की ओर से मंजूर सेटलमेंट योजना में निर्धारित शर्तें पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई ने 28 नवंबर 2025 को इस सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी थी। योजना के तहत पात्र लेनदारों को उनके सत्यापित दावों की लगभग 42 प्रतिशत रकम मिलने का प्रावधान है। इस योजना को 92 प्रतिशत से अधिक लेनदारों का समर्थन मिला था। बाद में NCLAT और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने वाली याचिकाएं भी खारिज हो गईं।
यह मामला वर्ष 2013 में सामने आए पेमेंट डिफॉल्ट से जुड़ा है। उस समय करीब 13,000 निवेशकों की लगभग 5,600 करोड़ रुपये की रकम बकाया रह गई थी। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि वास्तविक कमोडिटी स्टॉक के बिना कारोबार की अनुमति दी गई, जिससे भुगतान संकट पैदा हुआ।
ED ने इस मामले में 35 प्रोविजनल अटैचमेंट आदेशों के जरिए लगभग 3,464 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। अदालत के ताजा आदेश के बाद संपत्तियों को बेचकर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। यदि बिक्री से 1,950 करोड़ रुपये से अधिक रकम मिलती है, तो अतिरिक्त राशि अदालत की निगरानी में रहेगी और उसका निपटारा आगे की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा।



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