ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी MI5 ने अदालतों में दिए गए गलत सबूतों को लेकर गंभीर गलती स्वीकार की है। मामला एक नव-नाजी चरमपंथी से जुड़ा है, जो MI5 के लिए गोपनीय मानव स्रोत यानी एजेंट के तौर पर काम करता था। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, MI5 की ओर से दी गई गलत गवाही का इस्तेमाल तीन अलग-अलग कानूनी कार्यवाहियों में हुआ।
मामले में MI5 के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया था कि एजेंसी ने अपनी ‘न तो पुष्टि, न इनकार’ (NCND) नीति का पालन किया और कभी यह पुष्टि नहीं की कि संबंधित व्यक्ति उसका एजेंट था। हालांकि बाद में सामने आए रिकॉर्ड और बातचीत की रिकॉर्डिंग से पता चला कि MI5 के एक अधिकारी को 2020 में पत्रकार डेनियल डी सिमोन को उसके एजेंट होने की जानकारी देने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने कहा कि इस गलत गवाही से हाई कोर्ट और जांच अधिकार न्यायाधिकरण (IPT) गुमराह हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह विचार किया जा रहा है कि क्या MI5 के किसी अधिकारी या एजेंसी के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
MI5 ने अदालत से माफी मांगी है और कहा है कि ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए। एजेंसी ने सुधार के लिए कार्यक्रम शुरू करने की भी बात कही है। वहीं, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
अदालत अब यह तय करेगी कि गलत सबूत देने के मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएं।



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