झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद का असर अब उन उम्मीदवारों पर भी पड़ रहा है, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी हासिल की थी। पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने कई पुरानी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने या उनकी समीक्षा करने का फैसला लिया है।

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रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा के जरिए नियुक्त करीब 1,932 कर्मचारी और 64 नए बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) सितंबर की शुरुआत में काम पर लौटे। हालांकि, उनकी नियुक्तियों को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।


अगस्त में भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ युवाओं के प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दीं, छह परीक्षाओं की समयसीमा स्थगित की और 17 पुरानी परीक्षाओं की जांच शुरू की। इनमें JSSC-CGL, CDPO और कुछ JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं भी शामिल हैं।


JSSC-CGL परीक्षा पहले पेपर लीक विवाद के कारण रद्द हुई थी। इसके बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा के परिणाम पर भी सवाल उठे, लेकिन दिसंबर 2025 में CID जांच में पेपर लीक का सबूत नहीं मिलने की जानकारी के बाद अदालत ने परिणाम पर लगी रोक हटा दी। इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को नियुक्ति पत्र बांटे गए।


अब हाई कोर्ट ने कहा है कि व्यापक स्तर पर हुई नियमित नियुक्तियों को अचानक खत्म करना और सभी उम्मीदवारों को एक जैसा दोषी मानना उचित नहीं होगा। हालांकि, अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


इस पूरे विवाद ने झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और सफल उम्मीदवारों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।